Kharun Paar Review: छत्तीसगढ़ी सिनेमा की बहु चर्चित फिल्म खारून पार सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। इस फिल्म को फैंस की ओर से अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। तो आईए जानते हैं यह फिल्म कैसी है…
खारुन पार की कहानी
खारून पार फिल्म की कहानी बबलू, रानी, क्रांति ,पारुल और विवेक के इर्द-गिर्द घूमती है। बबलू एक डीजे वाला है जो अपने जीवन में मस्त रहता है। तभी उसकी लाइफ में रानी की एंट्री होती है। उसके बाद धीरे-धीरे क्रांति और पारुल की कहानी हमें देखने को मिलती है। फिल्म का फर्स्ट हाफ कहानी को स्टेब्लिश करने में निकल जाता है। बबलू और अमन सागर की जोड़ी लोगों को हंसाती है। वही क्रांति का संसय भरा किरदार लोगों को सीट से बांधकर रखता है। बीच-बीच में बबलू और उसके पिता की नोकझोंक कहानी में तड़का लगाने का काम करती है।
इंटरवल के बाद कहानी रफ्तार पकड़ती है और दर्शकों को ढेर सारे ट्विस्ट एंड टर्न्स देखने को मिलती है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी काफी अच्छी है और कैमरा एंगल भी फिल्म को देखने में रिच फील कराता है। बाकी रायपुर, भाटागांव और खारून पार को काफी अच्छे तरीके से कैमरा में कैप्चर किया गया है। फिल्म के संवाद काफी अच्छे हैं। वहीं कई जगह यह लोगों को निराश भी करती हैं। क्रांति दीक्षित के खाते में जितने भी डायलॉग आए हैं वह शानदार है और रानी बबलू की जोड़ी भी अच्छी लगती है।
निर्देशन और अभिनय
खारुन पार फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी इसके डायरेक्टर दिव्यांश सिंह और साई भारत है। जिन्होंने बड़े पर्दे पर कहीं भी अपनी फिल्म की कहानी मरने नहीं दिए हैं। फिल्म के क्लाइमेक्स को वह काफी ग्रैंड बना सकते थे लेकिन उसे मनोरंजक तरीके से पेश करना एक साहस भरा कदम है। बाकी शील वर्मा और एल्सा घोष ने काफी अच्छा काम किया है। विशाल और राया को जितने भी सीन मिले हैं। उसमें वह जंचते हैं लेकिन क्रांति दीक्षित का एक्सप्रेशन और उनकी डायलॉग डिलीवरी पूरी फिल्म को नेक्स्ट लेवल में ले जाने का काम करती है।
देखें या न देखें :- अगर आप छत्तीसगढ़ी सिनेमा की प्यार मोहब्बत वाली फिल्मों से तंग आ चुके हैं तो यह फिल्म आपको पसंद आएगी। यदि आप सस्पेंस थ्रिलर फिल्मों के शौकीन है तो एक बार इस फिल्म को देख सकते हैं।
