Dhanteras Puja Vidhi, Muhurat: धनतेरस में ऐसे करें मां लक्ष्मी की पूजा, जानिए भगवान धन्वंतरि को खुश करने की विधि

Dhanteras Puja Vidhi, Muhurat: कल यानि 18 अक्टूबर को पूरे देश में धूमधाम से धनेतरस पर्व मनाया जाएगा। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह त्योहार मनाया जाता है। जिसके कारण इसे धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक इसी दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर समुद्र से प्रकट हुए थे। जिसके कारण इस दिन माता लक्ष्मी के साथ ही भगवान धन्वंतरि की भी पूजा की जाती है। धनतेरस के दिन ही कुबेर देव की भी पूजा की जाती है, तो आईए जानते है पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

जानिए शुभ मुहूर्त

धनतेरस की पूजा सूर्यास्त (Dhanteras Puja Vidhi, Muhurat) के बाद की जाती है और इस व्रत 18 अक्टूबर को शाम 7 बजकर 15 मिनट से लेकर रात्रि 8 बजकर 20 मिनट तक का समय पूजा के लिए सबसे शुभ रहेगा। पूजा में अक्षत, हल्दी, फूल, मिष्ठान आदि अर्पित करें। इसके बाद मंत्रों का जप करें। अंत में आरती के बाद पूजा की समाप्ति करें और प्रसाद का वितरण करें।

ऐसे करें भगवान धन्वंतरि की पूजा

​धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा के लिए उनकी तस्वीर को लकड़ी की चौकी पर वस्त्र बिछाकर (Dhanteras Puja Vidhi, Muhurat) स्थापित करें। इसके बाद, आचमनी से जल लेकर तीन बार आचमन करें। भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा पर जल का छिड़काव करके रोली और अक्षत से टीका करें। इसके बाद, वस्त्र और कलावा अर्पित करें। अक्षत लेकर धन्वंतरि भगवान का ध्यान करें और उन्हें प्रणाम करते हुए फूल व अक्ष अर्पित कर दें। साथ ही, ‘ओम श्री धनवंतरै नम:’ का जाप करें।

इन मंत्रों का करें जाप

गणेश मंत्र: वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा.
लक्ष्मी मंत्र: ऊँ श्रींह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मी नम:
कुबेर मंत्र: ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः

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