एमडी. शाजान, रायपुर। ‘दिया तले अंधेरा’… यह मुहावरा तो आपने सुना ही होगा, जिसका अर्थ है ‘जो दूसरों को उपदेश देता है, उसका स्वयं का आचरण सही न होना’ कुछ ऐसा ही इस समय छत्तीसगढ़ में हो रहा है। दरअसल, प्रदेश में पहले तो बिजली (लाइट), दूसरा स्मार्ट मीटर और तीसरा बढ़े हुए बिजली बिल के दाम को लेकर काफी आक्रोश देखने को मिल रहा है। भारत का पावर हब कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ की हालत ऐसी हो गई है, मानो जैसे दिया तले सच में अंधेरा हो गया है।
जी हां… दूसरों को बिजली सप्लाई करने वाले छत्तीसगढ़ में ही बिजली, मीटर और उसके दाम को लेकर काफी समस्या है। यूं तो प्रदेश में 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है, लेकिन फिर भी बिजली का काल पड़ा हुआ है। राजधानी की बात करें तो यहां अलग-अलग इलाकों में 3 से 4 घंटे तक बिजली गुल रहती है। ऐसे में आप खुद ही अंदाजा लगा सकते है कि जब छत्तीसगढ़ की राजधानी की यह हालत है तो अन्य शहरों, गांव कस्बों का क्या आलम होगा ?
अब बात करते है, स्मार्ट मीटर और बढ़े हुए बिजली के दामों की… प्रदेशभर में स्मार्ट मीटर लगाया जा रहा है। बड़े शहरों में यह काम लगभग पूरा हो गया है। बहुत सी जगहों पर स्मार्ट मीटर शुरू भी हो चुका है। लेकिन इसकी विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे है। ऐसा इसलिए क्यों कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद से बिजली के बिल अचानक से बढ़ गए है।
बिजली बिल में इस अप्रत्याशित वृद्धि से प्रदेश की जनता में आक्रोश है। खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए आर्थिक बोझ बन रही है। ऐसे में अब स्मार्ट मीटिर की कार्यप्रणाली और बिलिंग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठने लगी है।
आखिर में यही कहेंगे कि बिजली प्रदान करने वाला मुख्य केंद्र छत्तीसगढ़, जो न सिर्फ यह के नागरिकों को रोशनी प्रदान करता है, बल्कि अन्य राज्यों को भी ऊर्जा प्रदान करता है। ऐसे में अगर खुद का आलम यह होगा, तो फिर दूसरों को बिजली सप्लाई करने का क्या उद्देश्य है ? इसलिए ‘दिया तले अंधेरा’ वाले मुहावरे का इस्तेमाल किया गया। बहरहाल अब देखना होगा कि सरकार इन मुद्दों पर कब तक ध्यान देती है और क्या समाधान निकालती है।
